बांग्लादेश में संसदीय चुनावों के दौरान आवामी लीग ने वैश्विक समुदाय को आगाह किया कि ये ‘मजाकिया’ मतदान देश को विखंडन की ओर ले जा रहे हैं। पार्टी ने हस्तक्षेप की मांग की और साजिशों का पर्दाफाश किया।
यह केवल आवामी लीग को निशाना बनाने की कोशिश नहीं, बल्कि उदारवादी और कट्टरपंथ विरोधी दलों को बाहर करने की है। पार्टी से जुड़े लाखों वोटर जान से मारने की धमकियों, डर और सरकारी दमन से जूझ रहे हैं। नतीजतन, वे जबरन वोट डाल रहे हैं, जो टर्नआउट गढ़ने की चालबाजी है।
मतदान स्थलों पर लिंचिंग और अमानवीय यातनाओं का राज है। कारागार अवामी लीग समर्थकों ही नहीं, पत्रकारों, कार्यकर्ताओं और अपराध विरोधियों से लबालब हैं—झूठे हत्या आरोपों में।
शासन परिवर्तन के बाद अल्पसंख्यकों पर नरसंहार का खतरा मंडरा रहा है। उन्हें लक्ष्य बनाकर हिंसा को बढ़ावा दिया जा रहा। महिलाएं, मतदाताओं का बड़ा हिस्सा, नीतिगत फैसलों से दूर रखी गईं और अंधेरे दौर से जूझ रही हैं।
प्रतिद्वंद्वी दलों द्वारा चुनावी धांधली के सबूत वायरल हैं, आचार संहिता की खुली अवज्ञा। अंतरिम सरकार पर रेफरेंडम के बहाने धन लूट और वोट इंजीनियरिंग का इल्जाम। यह संविधान-विरोधी कृत्य है, जो पाकिस्तानी सेना के खिलाफ लड़े स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को कुचलता है।
आवामी लीग ने पर्यवेक्षकों से कमियों को नोटिस करने को कहा। यूनुस शासन के झूठे वादों ने देश को खतरनाक अस्थिरता में झोंक दिया है। 17 महीनों में असहिष्णु संगठनों को पनाह मिली।
वोटिंग 299 सीटों पर चल रही, परिणाम फौरन आएंगे। यह बयान बांग्लादेशी लोकतंत्र के संकट को रेखांकित करता है।