वैश्विक अस्थिरता के बीच भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता उभरता सितारा है, जिसे ‘सभी डील्स की मां’ कहा जा रहा। ऊंचे करों और संस्थागत कमजोरियों के दौर में यह नया रास्ता दिखाता है।
उर्सुला वॉन डेर लेयेन, एंटोनियो कोस्टा और नरेंद्र मोदी की संयुक्त घोषणा से 2 अरब लोग और दुनिया की 25% जीडीपी एकजुट हो रही है।
प्रोफेसर रविंदर कौर बताती हैं कि यह साझेदारी वैश्विक संस्थाओं, रक्षा, अनुसंधान, यात्रा और संपर्क में गहराई लाएगी, खासकर हिंद-प्रशांत में।
अमेरिकी एकांतवाद से हिंद-प्रशांत ईयू को गले लगा रहा है। ‘पोस्ट-अमेरिका विश्व’ का आकार लेना शुरू हो चुका, इस डील से साबित।
ईयू-मर्कोसुर, भारत-ब्रिटेन-न्यूजीलैंड डीलें इसी कड़ी का हिस्सा। बाधाओं के बावजूद, बहुपक्षीयता, स्वायत्तता और डॉलर-मुक्त अर्थव्यवस्था की ओर तेज रफ्तार।
एशिया सोसाइटी की फरवा आमेर कहती हैं, ईयू समझौते ने अमेरिका-भारत व्यापार बातचीत को गति दी, जो लंबे समय से ठप थी। समयबद्ध कदम ने संतुलन बदला।