चुनावी माहौल में बांग्लादेश हिंदुओं पर लगातार हमलों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को झकझोर दिया। वैश्विक हिंदू गठबंधन ने हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु त्वरित वैश्विक कदम उठाने का अल्टीमेटम दिया है।
हिंदूज एडवांसिंग ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव (एचएएचआरआई) ने हिंदूपैक्ट के बैनर तले 15 देशों से 125+ संगठनों का समर्थन जुटाया। पत्र में हत्याएं, धमकियां, मंदिर तोड़फोड़ और जबरन बेदखली का क्रमिक चक्र उजागर किया गया।
राहुल सुर ने जोर देकर कहा, ‘हिंदू बांग्लादेश के आदिवासी हैं, जिन्हें यूएन के 2007 सम्मेलन से जीवन-संस्कृति की गारंटी। लेकिन हो रहा है ठीक विपरीत – दंडरहित निरंतर संकट।’
दीपू चंद्र दास की 18 दिसंबर 2024 की हत्या, ईशनिंदा बहाने से, वीडियो के साथ वैश्विक सनसनी। मंदिरों पर प्रहार, घरों पर छापे, झूठे आरोपों का चलन।
पिछली सत्ता परिवर्तन के बाद अगस्त से नवंबर 2024 तक 2,673 अल्पसंख्यक हमले। हिंदू जनसंख्या 1951 के 22% से घटकर <7%, वार्षिक 2.3 लाख पलायन – इसे धार्मिक सफाया कहा।
अजय शाह बोले, 'आंकड़े खौफनाक हैं। हिंसा से सिकुड़ता अल्पसंख्यक लोकतंत्र की परीक्षा है, वैश्विक नाकामी का प्रमाण।'
अमेरिका को फैक्ट-टीम, ट्रेड सजा, रिफ्यूजी मदद, यूएन मिशन जांच; ईयू को टैरिफ-प्रोब; यूएन को भर्त्सना-तहकीकात की अपील।
अमेरिका के 25+ शहरों में धरने, यूएन को लाखों साइन वाली अपील। सुर ने कहा, 'यह जनआंदोलन है, सार्वभौमिक अधिकारों की एकरूपता की मांग।'
यूएन रिपोर्ट्स, यूएस संसद, भारत-अमेरिका मंचों पर पुराना मुद्दा। अब कार्रवाई अनिवार्य।