अमेरिका में प्रवासन नीतियों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। रिपब्लिकन प्रतिनिधि ग्रेग स्ट्यूबी ने एच-1बी वीजा प्रोग्राम को समाप्त करने वाला विधेयक पेश किया है। उनका कहना है कि यह व्यवस्था देशवासियों के बजाय विदेशी कामगारों को फायदा पहुंचाती है, जिससे अमेरिकी बेरोजगारी बढ़ रही है।
‘एक्साइल एक्ट’ नामक इस बिल के तहत इमिग्रेशन कानूनों में बदलाव कर 2027 से एच-1बी वीजा की संख्या शून्य कर दी जाएगी। स्ट्यूबी ने इसे ‘शोषणकारी विदेशी श्रम आयात’ करार दिया है।
यह वीजा तकनीकी, इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य और वित्तीय क्षेत्रों में विदेशी विशेषज्ञों को नौकरी देने की छूट देता है। लेकिन स्ट्यूबी का तर्क है कि इससे अमेरिकी युवा और कर्मचारी प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘हमारे श्रमिकों को हाशिए पर धकेलना हमारे राष्ट्रहित के खिलाफ है।’
स्ट्यूबी ने चेतावनी दी कि विदेशी श्रमिकों को प्राथमिकता देने से अमेरिकी सपना खतरे में है। उनके अनुसार, वीजा धारकों में 80% से ज्यादा भारत और चीन के नागरिक हैं, जो सस्ते श्रम के रूप में इस्तेमाल हो रहे हैं।
यह प्रोग्राम मूल रूप से कुशल विदेशी प्रतिभाओं को लाने के लिए शुरू हुआ था, किंतु अब यह राजनीतिक बहस का मुद्दा बन चुका है। एक्साइल एक्ट से अमेरिकी कंपनियों की भर्ती प्रक्रिया पर असर पड़ेगा।
कांग्रेस में इस विधेयक पर चर्चा तेज हो रही है। समर्थक इसे अमेरिकी प्राथमिकता का प्रतीक मानते हैं, जबकि विरोधी नवाचार पर असर की आशंका जता रहे हैं। आने वाले दिनों में इसकी दिशा स्पष्ट होगी।