बांग्लादेश में 12 फरवरी के लोकसभा चुनावों से पहले अल्पसंख्यक वर्ग में असुरक्षा की भावना चरम पर है। रिपोर्ट बताती है कि राजनीतिक उथल-पुथल और कट्टरता ने ईसाई, हिंदू व बौद्धों को गहरे संकट में धकेल दिया।
ब्रूस एलन ने फॉरगॉटन मिशनरीज इंटरनेशनल की ओर से कहा कि समाज अस्थिरता से जूझ रहा। यूनुस सरकार की लापरवाही से हिंसा, गुस्सा व मूल्यवृद्धि बढ़ी। “सब कुछ अस्त-व्यस्त है,” उन्होंने चेताया।
लोग वोटिंग का इंतजार कर रहे, मगर नाराजगी भी चरम पर। युवा आंदोलन बिखर चुका, नेशनल सिटिजन पार्टी का जमात से गठजोड़ खतरे की घंटी।
अल्पसंख्यकों पर असर सबसे बुरा। कट्टरपंथी अराजकता में सक्रिय। चर्चों को खतरा, पादरी मिंटू का निर्माण कार्य 18 माह से ठप।
ईसाई अक्सर गैर-मालिकाना जमीनों पर, बेदखली का भय। मुस्लिम समाज की श्रेष्ठता से रिश्ते संवेदनशील। चुनावी माहौल में सुरक्षा जरूरी।