अमेरिका से तनावपूर्ण संबंधों के दौर में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई ने राष्ट्र को एकजुट होकर दुश्मन को करारा जवाब देने का निर्देश दिया। इस्लामिक क्रांति की 47वीं बरसी से पूर्व टेलीविजन संबोधन में उन्होंने स्पष्ट किया कि सैन्य साजो-सामान से ज्यादा महत्वपूर्ण है अडिग संकल्प। ‘दुश्मन को हताश करो, वरना दासता निभानी पड़ेगी,’ उनका करारा संदेश था।
बुधवार को होने वाले देशव्यापी आयोजनों को खामेनेई ने विदेशी साजिशों के विरुद्ध गौरवपूर्ण विद्रोह का प्रतीक बताया। मध्य पूर्व में अमेरिकी फौजों की मौजूदगी और तेहरान विरोधी बयानों ने माहौल को और गरमा दिया है। ओमान में हालिया परोक्ष परमाणु चर्चा के बावजूद कोई ठोस प्रगति नहीं हुई।
राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने वार्ता को सकारात्मक बताया, जो 2025 के इजरायल युद्ध और अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की शांतिपूर्ण नीति का फल है। लेकिन विश्लेषक इसे संकट टालने की कोशिश मानते हैं। पेजेशकियन ने सोशल मीडिया पर कहा कि ईरान परमाणु संधि के अधिकारों का पालन कर रहा है और सम्मान का जवाब सम्मान से देगा।
1979 की क्रांति ने अयातुल्ला खुमैनी के नेतृत्व में शाह को गद्दी से हटाया, जिसके बाद 1980 में अमेरिका से रिश्ते छिन गए। खामेनेई आशा करते हैं कि यह जश्न वैश्विक शक्तियों को ईरान का आदर सिखाएगा।
अली लारीजानी का ओमान दौरा द्विपक्षीय मुद्दों पर केंद्रित होगा। विदेश मंत्री अराघची ने ओमान को भावी बातचीत का केंद्र बनाए जाने की पुष्टि की।
यह अपील ईरान को ऐतिहासिक गौरव और वर्तमान चुनौतियों से जूझने की प्रेरणा देती है, जहां एकता ही सबसे बड़ा हथियार है।