अमेरिकी दबाव के चलते क्यूबा ने हवाई यात्रा पर ब्रेक लगा दिया है। वेनेजुएला से तेल रुकने के कारण सभी एयरलाइंस को एक महीने तक जेट ईंधन न मिलने की सूचना दे दी गई है। हवाना के हवाई अड्डों पर अब रिफ्यूलिंग संभव नहीं, जिससे उड़ानें विदेशी ठिकानों पर रुकेंगी।
यह प्रतिबंध सोमवार रात 12 बजे से शुरू हो रहा है और छोटी-बड़ी सभी उड़ानों को निशाना बनाएगा। एयरलाइंस को कैनकन, पुंटा काना या नासाउ जैसे स्थानों पर जाना पड़ेगा, जबकि एयर फ्रांस कैरेबियन विकल्प तलाश रहा है। लागत और समय दोनों बढ़ेंगे।
400 साप्ताहिक उड़ानें खतरे में हैं, जो द्वीप की बाहरी दुनिया से कनेक्टिविटी को कमजोर कर रही हैं। वाशिंगटन की वेनेजुएला में सैन्य कार्रवाई ने तेल प्रवाह रोका, जिससे बिजली की कमी ने ब्लैकआउट का संकट खड़ा कर दिया। सरकार ने कामकाजी दिन घटाए, बसें कम कीं, ईंधन बांटा और पर्यटन रोका।
अविएशन विभाग ने साफ कहा- फ्यूल खत्म। अमेरिका ने 6 मिलियन डॉलर मदद देने का ऐलान किया, लेकिन क्यूबा के राष्ट्रपति डियाज-कैनेल ने अमेरिका को ‘ऊर्जा घेराबंदी’ का जिम्मेदार ठहराया। ट्रंप की तेल बेचने वालों पर टैरिफ की चेतावनी को मनोवैज्ञानिक हमला बताया।
क्यूबा का यह संकट वैश्विक उड्डयन को हिला रहा है। यात्रियों को परेशानी, अर्थव्यवस्था को झटका, और भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है। ऊर्जा संकट ने क्यूबा की कमजोरियां सामने ला दी हैं।