बांग्लादेश में उग्र भीड़ों ने मीडिया संस्थानों पर हमले किए, लेकिन मास्टरमाइंड विदेश में थे। न्यूयॉर्क और पेरिस से इलियास हुसैन व पिनाकी भट्टाचार्य ने फेसबुक के जरिए लाखों को भड़काया। रिपोर्ट ने उनके ग्लोबल नेटवर्क का पर्दाफाश किया है।
दिसंबर 2025 की रात हुसैन का पोस्ट ‘प्रथम आलो को नेस्तनाबूद कर दो’ उनके 22 लाख फॉलोअर्स तक फैला। एल्गोरिदम ने इसे तेजी से वायरल किया। नतीजा, ढाका में कार्यालय पर हमला। भट्टाचार्य के सहयोग से डेली स्टार, छायानाट जैसे ठिकानों पर भी हिंसा हुई।
ये दोनों एक साल से इन संस्थानों को भारत समर्थित गलत खबरें फैलाने का दोषी ठहरा रहे थे। फरवरी 2025 में हसीना के घर को ध्वस्त करने की घटना उनके उकसावे का नतीजा थी। वीडियो और पोस्ट से उन्होंने फॉलोअर्स को लगातार भड़काया।
आगजनी के दौरान उपद्रवियों ने नई सरकार की मांग की, जिसमें इनका नाम लिया। दोनों के सरकारी अधिकारियों से रिश्ते थे। यूनुस की अंतरिम सरकार के सत्ता में आने के बाद कानून-व्यवस्था बिगड़ी, पत्रकार निशाने पर आए।
यह घटना सीमा पार सोशल मीडिया के खतरे को रेखांकित करती है, जहां दूर बैठे लोग देश में अराजकता फैला सकते हैं। सरकारों को ऐसे अभियानों का मुकाबला करने के लिए नई रणनीति चाहिए।