अफगानिस्तान में आईएसकेपी की नई रणनीति भारतीय युवाओं के लिए जाल बुन रही है। पहले सीरिया-इराक में मामूली काम दिए जाते थे, अब अफगानिस्तान भेजकर उन्हें लड़ाई और आत्मघाती दस्तों में शामिल किया जा रहा है। प्रचार के बल पर इन्हें महानायक दिखाया जा रहा।
पहले की भर्तियां नाराज होकर लौटीं, लेकिन अब अफगानिस्तान की सांस्कृतिक निकटता आकर्षित कर रही है। खुफिया सूत्रों के मुताबिक, खाड़ी मार्ग से होते हुए ये पहुंचते हैं। अबू खालिद अल-हिंदी जैसे केरल निवासी ‘वॉयस ऑफ खुरासान’ में छाए हैं।
हाल के महीनों में ऑनलाइन भर्ती कई गुना बढ़ी है। संगठन के नुकसान के बीच भारतीय सबसे उपयुक्त लग रहे। भारत से बड़ी संख्या में अफगानिस्तान भेजने की साजिश रच रहे हैं। एजेंसियां हर मूवमेंट पर नजर रखे हुए हैं।