दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश चीन अब जनसंख्या ह्रास से जूझ रहा है। एक बच्चा नीति के दौर से उलट, सरकार अब परिवारों को बढ़ाने के लिए प्रेरित कर रही है। 2025 में जन्म केवल 79.2 लाख रहे, पिछले साल के 95.4 लाख से 17 फीसदी गिरावट। जन्मदर 5.63 प्रति हजार पर सिमट गई – 75 सालों का न्यूनतम।
पुरानी नीतियों ने महिलाओं को यातनाएं दीं – जबरन ऑपरेशन, जुर्माने। बेटा भेद ने लिंग असंतुलन पैदा किया। नीतियां ढीली हुईं, लेकिन युवा महंगाई, नौकरी असुरक्षा और लिंग भेद से परहेज कर रहे हैं।
सरकार सब्सिडी, अवकाश और प्रचार चला रही है, लेकिन विशेषज्ञ चेताते हैं: बच्चों को आर्थिक हथियार बनाना गलत। बढ़ती उम्रदराज आबादी, कमजोर अर्थव्यवस्था का खतरा। गहन सुधार जरूरी, वरना चीन की चेतावनी भविष्य बन सकता है।