अमेरिका के सहयोग से अबू धाबी में रूस-यूक्रेन की दूसरी वार्ता समाप्ति पर पहुंची, जहां 314 कैदियों की अदला-बदली तय हुई। 157-157 की यह रिहाई लंबे इंतजार के बाद आई, मगर जमीन, संघर्ष विराम व सुरक्षा जैसे मुद्दे वैसे के वैसे हैं।
तीन पक्षीय बातचीत से शुरू होकर विस्तृत बहसों तक पहुंची चर्चा बिना संयुक्त घोषणा के थम गई। यूक्रेन के उमेरोव ने स्थायी शांति का आग्रह किया, बिना विवरण दिए। रूसी प्रतिनिधि चुप्पी साधे रहे।
विटकॉफ ने प्रक्रिया को रचनात्मक कहा, पर पूरे संकट के हल में लंबा सफर बाकी बताया। जेलेंस्की ने सैन्य व असैन्य कैदियों की वापसी का जश्न मनाया।
यूएई ने मध्यस्थता पर गर्व जताया, संकट न्यूनीकरण में अपनी भूमिका रेखांकित की। आगे की बैठकों का कोई प्लान नहीं, फिर भी जेलेंस्की ने अमेरिका में शीघ्र चर्चाओं का ऐलान किया।
यह घटना युद्ध की विभीषिका के बीच एक सकारात्मक संकेत है। कूटनीतिक प्रयासों को गति मिलनी चाहिए, ताकि हिंसा थमे और शांति स्थापित हो सके। वैश्विक शक्तियां अब निर्णायक कदम उठाएं।