अमेरिका स्थित थिंक टैंक की रिपोर्ट ने पाकिस्तान पर निशाना साधा है, जिसमें ईरान समर्थन को उसके प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी दर्जे के लिए घातक बताया गया है। इस्लामाबाद के कदम वैश्विक शांति प्रयासों में उसकी भूमिका को संदिग्ध बनाते हैं।
15 जनवरी 2026 को बने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में ट्रंप का पाक पीएम को निमंत्रण अब विवादास्पद लग रहा। तुर्की वार्ता में भागीदारी के बावजूद पाकिस्तान की निष्पक्षता पर शक है।
ख्वाजा आसिफ ने 13 जनवरी को ईरान की संप्रभुता को पाकिस्तान का मूल्य बताया। ईरानी राजदूत के साथ 20 जनवरी की बैठक में मजबूत समर्थन दोहराया। यूएन में ईरान हिंसा जांच रोकने का पाक वोट ईरानी विदेश मंत्री ने सराहा।
2025 के जून युद्ध में पाक ने ईरान का साथ निभाया। पेजेशकियन की अगस्त यात्रा ने व्यापार संबंध मजबूत किए। रिपोर्ट एमएनएनए स्थिति पर पुनर्विचार और पाक को ईरान वार्ताओं से हटाने की मांग करती है।
यह रिपोर्ट अमेरिका को सतर्क करती है कि पाकिस्तान अविश्वसनीय साझेदार है। सैन्य लाभ छीनना जरूरी, ताकि रणनीतिक विश्वास कायम रहे। दक्षिण एशिया-मध्य पूर्व अक्ष में बड़ा परिवर्तन संभव।