अमेरिका की केंद्रीय खुफिया एजेंसी सीआईए ने अपने प्रसिद्ध वर्ल्ड फैक्टबुक को बंद करने का ऐलान किया है। 62 साल पुराने इस वैश्विक संदर्भ उपकरण का सफर समाप्त हो गया, जो दुनिया भर के देशों पर विश्वसनीय डेटा का खजाना था।
बुधवार को एजेंसी की वेबसाइट पर यह सूचना प्रकाशित हुई। कारण स्पष्ट नहीं किया गया, मगर विशेषज्ञ इसे निदेशक जॉन रैटक्लिफ की सुधार नीति से जोड़ते हैं, जो गैर-जरूरी प्रोजेक्ट्स को काटने पर जोर देती है।
यह टूल 1962 में गोपनीय प्रिंट फॉर्मेट में खुफिया कर्मियों के लिए लॉन्च हुआ था। विदेशी राष्ट्रों की आर्थिक स्थिति, सैन्य शक्ति, प्राकृतिक संपदा और सामाजिक ढांचे पर गहन आंकड़े उपलब्ध कराता था।
जल्द ही अन्य सरकारी विभागों ने अपनाया और 10 वर्षों में इसका सार्वजनिक संस्करण आ गया। 1997 का डिजिटल रूप इसे इंटरनेट पर हिट बना दिया – पत्रकार, विद्वान, छात्र और जिज्ञासु लाखों की संख्या में पहुंचे।
ट्रंप प्रशासन के दूसरे टर्म में सीआईए-एनएसए पर स्टाफ कटौती का दबाव पड़ा, जिसने संसाधनों को सीमित कर दिया।
सीआईए ने फैसले पर चुप्पी साधी। रैटक्लिफ का सीनेट बयान याद आता है: ‘सीआईए अपनी सही जगह पर नहीं है।’ चीन को शीर्ष प्रतिद्वंद्वी बताते हुए रूस, ईरान, किम जोंग-उन शासन, नार्को गिरोह, साइबर अपराधी और जिहादियों को खतरे गिनाए।
यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा पर फोकस को दर्शाता है। हालांकि, फैक्टबुक के बिना वैश्विक डेटा की स्वतंत्र पहुंच प्रभावित होगी, जो शोधकर्ताओं के लिए झटका है। भविष्य में नई वैकल्पिक व्यवस्थाएं उभरेंगी।