ढाका में चुनावी माहौल गरम है, क्योंकि 12 फरवरी को संसदीय चुनाव होने वाले हैं। इस बीच जमात-ए-इस्लामी ने अपना चुनावी घोषणापत्र पेश कर दिया, जिसमें भारत समेत सभी पड़ोसियों से शांति और सहयोग के संबंध बनाने का वादा किया गया है।
घोषणापत्र के अनुसार, भारत, भूटान, नेपाल जैसे देशों के साथ ईमानदारी और सम्मान पर आधारित सौहार्दपूर्ण संबंध विकसित होंगे। विदेश नीति में मुस्लिम जगत को प्राथमिकता देते हुए पश्चिमी देशों-अमेरिका, यूके, ईयू, जापान, कनाडा से मजबूत साझेदारी का लक्ष्य है।
पूर्वी यूरोप, अफ्रीका व लैटिन अमेरिका में संबंधों को गहरा करने की रणनीति भी है। संयुक्त राष्ट्र में शांति, मानवाधिकार और विकास जैसे मुद्दों पर सक्रियता बढ़ाने, एसएएआरसी व आसियान में निरंतर सहभागिता का वचन दिया गया।
रोहिंग्या समस्या का स्थायी हल निकालने के लिए वैश्विक समुदाय के साथ मिलकर काम करने और उनकी सम्मानजनक वापसी सुनिश्चित करने का प्रण लिया गया। यूएन शांति मिशनों में बांग्लादेश की मौजूदगी बरकरार रखने व पारदर्शी प्रवासन व्यवस्था बनाने पर जोर।
पाकिस्तान का नाम न लेना इस दस्तावेज की खासियत है। चुनावी दौड़ में जमात की यह पहल क्षेत्रीय व वैश्विक कूटनीति में नई बहस छेड़ सकती है।