श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में भगवान बुद्ध के देवनीमोरी के पवित्र अवशेषों का स्वागत हुआ। भारतीय वायुसेना के सी-130जे विमान से लाए गए ये अवशेष गंगारामया मंदिर में स्थापित हो चुके हैं और प्रदर्शनी का शुभारंभ धूमधाम से हो गया।
गुजरात गवर्नर आचार्य देवव्रत और डिप्टी सीएम हर्ष संघवी की अगुवाई में उच्च स्तरीय दल ने इस दायित्य का निर्वहन किया। सख्त प्रोटोकॉल और पूर्ण सम्मान के साथ लाए गए अवशेष भारत की बौद्ध विरासत के प्रति श्रद्धा को उजागर करते हैं।
भारतीय दल ने समारोहों, पूजा-अर्चना और आधिकारिक बैठकों में शिरकत की। प्रधानमंत्री की 2025 यात्रा के संकल्प को चरितार्थ करते हुए यह प्रदर्शनी सांस्कृतिक कूटनीति का नया अध्याय जोड़ रही है।
देवनीमोरी उत्खनन स्थल से निकले ये अवशेष प्राचीन इतिहास के साक्षी हैं। 1957 की खोज के बाद इन्हें आधुनिक तकनीक से सुरक्षित किया गया है—एयरटाइट कांच, सोने-चांदी की बोतल और रेशम के आवरण में।
5 फरवरी से भक्त दर्शन कर सकेंगे, जो 11 फरवरी तक चलेगा। इसके बाद अवशेष स्वदेश लौटेंगे। यह आयोजन दोनों राष्ट्रों के मध्य आध्यात्मिक पुल का काम कर रहा है।
मंदिर परिसर में भक्तों की भारी भीड़ जुट रही है। विशेषज्ञ इसे बौद्ध पर्यटन और धार्मिक पर्यावरण संरक्षण के लिए मील का पत्थर बता रहे हैं, जो शांति और एकता का संदेश प्रसारित कर रहा है।