भारत के यूरोपीय संघ संग हालिया एफटीए ने वैश्विक व्यापार पटल पर हलचल मचा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसने अमेरिका पर भारत के साथ त्वरित व्यापार pact करने का भारी दबाव डाला। एशिया सोसाइटी की फरवा आमेर ने सोमवार को कहा कि ईयू डील ने चल रही भारत-अमेरिका बातचीत को अप्रत्यक्ष रूप से गति प्रदान की।
समझौते का टाइमिंग खास था- ईयू pact के ठीक बाद पीएम मोदी व राष्ट्रपति ट्रंप ने ऐलान किया। अमेरिका भारत निर्यात पर टैरिफ 25% से 18% तक कम करेगा। रूस तेल विवाद से जुड़ा 25% अतिरिक्त शुल्क भी समाप्त। लगभग वर्षभर की उलझनों के बाद फोन वार्ता ने मुहर लगाई।
आमेर ने चेताया- रूस मुद्दा भारत के लिए बरकरार। तेल आयात बदलाव के बावजूद संबंधों की स्थिरता जरूरी। नेताओं की चर्चा निर्णायक साबित हुई।
पूर्व अमेरिकी ट्रेड प्रतिनिधि वेंडी कटलर ने कहा, भारतीय निर्यातकों को आसियान से फायदा- 18% बनाम 19-20% शुल्क। शायद अमेरिका को ईयू से बेहतर सौदा मिला। भारत बाधाओं को घटाने को तैयार, ट्रंप के बयान में स्पष्टता की कमी।
ट्रंप के ट्वीट में जिक्र- भारत बाधाओं को जीरो करने को अग्रसर। कटलर के शब्दों में, यह खनिज, टेक व चेन लचीलापन पर साझेदारी का आधार बनेगा।
समांतर में ईएएम जयशंकर का अमेरिका दौरा महत्वपूर्ण खनिज बैठक के लिए, जो रणनीतिक गठजोड़ को रेखांकित करता है।