अमेरिका के शीर्ष मंत्रियों ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर उत्साह जताया है। कृषि सचिव ब्रुक रोलिंस और ऊर्जा सचिव डग बर्गम ने इसे किसानों व ऊर्जा कंपनियों के लिए लाभकारी बताया। इस सौदे से अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
रोलिंस के अनुसार, भारत का तेजी से बढ़ता बाजार अमेरिकी कृषि के लिए सुनहरा अवसर है। पिछले साल 1.3 अरब डॉलर का व्यापार घाटा था, जो अब कम होगा। अधिक निर्यात से किसानों की आय बढ़ेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत बनेगी। उन्होंने इसे राष्ट्रपति ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति की सफलता कहा।
बर्गम ने ऊर्जा बिक्री व निवेश पर प्रकाश डाला। ट्रंप की कूटनीति की ताकत दिखाते हुए उन्होंने कहा कि इससे अंतरराष्ट्रीय संबंध सशक्त होंगे।
ट्रंप-मोदी की बातचीत से निकला यह समझौता भारतीय आयात पर 18 प्रतिशत टैरिफ कटौती और अमेरिकी सामानों के लिए आसान रास्ता लाया। भारत रूस का तेल छोड़कर अमेरिकी ऊर्जा, प्रौद्योगिकी व कृषि उत्पाद अधिक खरीदेगा। ट्रंप ने इसे संबंधों को सुदृढ़ करने वाला और यूक्रेन शांति प्रयासों का सहयोगी बताया।
पूर्व कूटनीतिज्ञ इवान फीगेनबाम ने सलाह दी कि आंकड़ों पर सावधानी बरतें। 500 अरब डॉलर खरीद का लक्ष्य चुनौतीपूर्ण है। अतीत के उतार-चढ़ाव के बाद यह सुधार लाता है, पर भरोसे की बहाली धीमी होगी।
शुल्क विवादों व ऊर्जा नीतिगत टकराव के दौर में यह सौदा राहत है। दोनों देश व्यापार, ऊर्जा व रणनीतिक मोर्चों पर नई शुरुआत की ओर बढ़ रहे हैं।