अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने पाकिस्तान की आर्थिक वृद्धि का पूर्वानुमान 3.2% से ठीक 3% पर ला पटका है, जो जनसंख्या विस्फोट से जूझ रहे देश के लिए खतरे की घंटी है। पाकिस्तानी समाचार स्रोतों ने इस बदलाव को प्रमुखता से उजागर किया है।
चालू वित्त वर्ष के पहले पांच माह में विनिर्माण क्षेत्र में 1.25% की कमी आई और निर्यात भी मंदे पड़े। रेमिटेंस ने रिकॉर्ड 8.8 अरब डॉलर का आंकड़ा छुआ, जो विदेशी सहायता के साथ अर्थव्यवस्था का एकमात्र विश्वसनीय इंजन है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी निर्भरता से टिकाऊ विकास असंभव है। आईएमएफ पैकेज की शर्तें कठोर सुधार थोपती हैं—जैसे अधिक टैक्स, सब्सिडी कटौती और तंग बजट—जो निवेशकों को दूर रखते हैं और सरकारी घाटे वाली कंपनियों का भार बढ़ाते हैं।
मध्य वित्त वर्ष में खाता अधिशेष, रुपए की मजबूती, मुद्रास्फीति में गिरावट और ब्याज दरों में छूट सकारात्मक हैं, मगर ये आईएमएफ राहत और यूएई के 2 अरब डॉलर जमा रोलओवर जैसी बाहरी घटनाओं पर आधारित हैं। घरेलू नीतियों का योगदान सीमित है।
कम वृद्धि और निवेश के बिना स्थिरता क्षणभंगुर साबित होगी। पाकिस्तान को निवेश बढ़ाने, प्रतिस्पर्धा मजबूत करने और सुधारों से नई दिशा देनी होगी।