कराची। विपक्षी दल पीटीआई ने सिंध पुलिस की कथित छापेमारियों से 180 कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी को लेकर सोमवार को सिंध हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। एमपीओ अध्यादेश के बहाने सुबह के अंधेरे में घरों पर दबिश दिए जाने का आरोप लगाया गया है।
पार्टी ने दावा किया कि कराची व सिंध के अन्य भागों में पुलिस ने पीटीआई नेताओं व कार्यकर्ताओं को बिन वजह हिरासत में लिया। सिंध सरकार ने इसे नकारते हुए राजनीतिक माहौल बिगाड़ने की कोशिश बताया।
याचिका में पीटीआई सिंध के महासचिव मंसूर अली व वकीलों के संगठन के प्रमुख फैसल मुगल ने 1 फरवरी के एमपीओ निर्देशों को अवैध ठहराया। प्रांतीय कैबिनेट के बिना मंजूरी के जारी इन आदेशों से संवैधानिक अधिकारों का हनन हुआ, दावा किया गया।
14 अधिकारियों को नामित करते हुए याचिकाकर्ताओं ने इन्हें असंवैधानिक व शून्य घोषित करने की मांग की। कराची के पूर्व, पश्चिम, दक्षिण जोन के डीआईजी से लेकर जिलों के एसएसपी तक पक्षकार बनाए गए।
पीटीआई ने शांतिपूर्ण गतिविधियों का हक जताया, जिसमें रैलियां व हड़तालें शामिल। अदालत से आदेश रद्द कर रिहाई की अपील की। अन्य केसों में वांछित न होने पर तत्काल मुक्ति हो।
सिंध सरकार की ओर से मंत्री शरजील मेमन ने खंडन किया। डॉन को दिए बयान में कहा, एमपीओ से कोई सामूहिक हिरासत नहीं। पीटीआई का बयान गलत सूचनाओं पर आधारित।
पाकिस्तान की सियासत में यह नया विवाद है। हाईकोर्ट का फैसला एमपीओ के इस्तेमाल पर रोशनी डाल सकता है।