ताइवान जलडमरूमध्य पर चीन का सैन्य दबाव चरम पर है। सत्ताधारी डीपीपी के चाइना अफेयर्स विभाग की रिपोर्ट से खुलासा हुआ कि पांच सालों में चीनी विमानों की घुसपैठ 15 गुना बढ़कर 2025 में 5,709 तक पहुंच गई। 2020 के 380 से शुरू यह सिलसिला अब रोजमर्रा की बात बन गया।
वर्ष दर वर्ष आंकड़े चौंकाने वाले: 2021-960, 2022-1,738, 2023-4,734, 2024-5,107। रिपोर्ट इसे बीजिंग की सुनियोजित रणनीति करार देती है, जो क्षेत्रीय संतुलन बिगाड़ने पर तुली है। ताइवान सैन्य योजनाओं का केंद्र बिंदु है।
ग्रे जोन रणनीति से ताइवान की सेना को थकाने और सीमाएं तोड़ने की कोशिश हो रही। अप्रैल 2025 का ‘स्ट्रेट थंडर’ और दिसंबर का ‘जस्टिस मिशन’ अभ्यास 22.2 किमी सीमा छूते हुए नाकेबंदी व हमलों का रिहर्सल था।
दायरा व्यापक है—दियाओयुताई से दक्षिण चीन सागर तक। विक्ट्री डे परेड ने ताकत दिखाई।
साथ ही, सूचना युद्ध तेज। एनएसबी की रिपोर्ट में 45,000 नकली अकाउंट्स से 23 लाख फर्जी खबरें उजागर। हाइमाई जैसी कंपनियां प्रचार फैला रही हैं, जो पहले आकर्षित कर बाद में राजनीतिक जहर घोलती हैं।
उद्देश्य साफ—समाज बांटना, हिम्मत तोड़ना, समर्थन कमजोर करना। ताइवान अब सक्रिय डिफेंस मोड में है, साझा प्रयासों से मुकाबला कर रहा।
क्षेत्रीय स्थिरता दांव पर है। वैश्विक एकजुटता जरूरी।