दुनिया प्रसिद्ध 14वें दलाई लामा ने ग्रैमी अवॉर्ड जीतकर एक और मील का पत्थर गाड़ा। बेस्ट ऑडियोबुक कैटेगरी में 90 वर्षीय इस नोबेल विजेता ने वनीली आइस के फैब मोरवान, जज जैक्सन, ट्रेवर नोआ व कैथी गार्वर को हराया।
स्ट्रीमिंग समारोह में रुफस वेनराइट ने एल्बम ‘मेडिटेशन्स…’ के लिए पुरस्कार लिया, जो भारतीय शास्त्रीय प्रभाव से समृद्ध है।
हिस होलीनेस बोले, ‘विनम्र स्वीकृति। यह हमारी साझा जिम्मेदारी का सम्मान है—शांति, दया, पर्यावरण रक्षा, मानवीय एकजुटता जरूरी।’ ग्रैमी इन विचारों को फैलाने में मददगार साबित होगा।
1959 में तिब्बत छोड़ने का साहसिक कदम: सिपाही बनकर नोरबुलिंगका से 14 दिन की कष्ट यात्रा, भारत आगमन। धर्मशाला में लंबे प्रवास के साथ मानव मूल्य, संस्कृति संवर्धन।
तेनजिन ग्यात्सो 17 मार्च को भारत पहुंचे। बुद्ध की करुणा प्रतिमूर्ति माने जाते हैं। पुस्तक ‘इन वॉइस…’ तिब्बत संकट, चीन संबंध, निर्वासन जीवन चित्रित करती है।
16 में हमला, 19 में माओ मुलाकात, 25 में निर्बासित नेता बने। मसूरी से धर्मशाला (1960) तक। निर्वासियों को संदेश: ‘संस्कृति बचाओ, तिब्बत मुक्त होगा।’ भारत में एक लाख तिब्बती इस ध्येय पर दृढ़।