पाकिस्तान में इमिग्रेशन धांधली का नया चेहरा सामने आया है। इस्लामाबाद हवाई अड्डे पर एफआईए ने दो लोगों को फ्रांस के फर्जी विजिट वीजा के साथ हिरासत में लिया, जो फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू के सीनियर अधिकारी से जुड़े हैं।
संदिग्धों ने एफबीआर स्टाफ बनकर यूरोपियन पार्लियामेंट की मीटिंग का बहाना बनाया। जीमेल और फर्जी एफबीआर ईमेल के बीच चैट दिखाई, लेकिन वेरिफिकेशन में पूरी साजिश बेनकाब हो गई।
कोई सरकारी अनुमति नहीं, कोई रोजगार प्रमाण नहीं। यात्रा शेड्यूल में स्पेन का ट्विस्ट असल उद्देश्य—अवैध बसावट—खोल देता है।
व्हाट्सएप चैट्स और बैंक ट्रांजेक्शन से पता चला कि यह मुनाफाखोर गिरोह है। लाखों रुपये के लेनदेन मध्यस्थों तक पहुंचे।
पाकिस्तान की मीडिया इसे संस्थागत कमजोरी बता रही है। विजिट वीजा का गलत इस्तेमाल देश की इमेज खराब कर रहा है। आम नागरिकों को अब और सतर्कता बरतनी पड़ रही।
यदि आरोप सही साबित हुए, तो यह निजी भ्रष्टाचार से कहीं आगे, सिस्टम की नाकामी को दर्शाएगा। जांच एजेंसियां गहराई में उतर रही हैं, सुधार की मांग तेज हो गई है।