भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट वैश्विक व्यापार की नई कहानी लिख रहा है। विशेषज्ञ इसे ‘महासौदा’ बता रहे हैं, जिसकी गूंज पड़ोसी देशों तक पहुंच रही है।
जब महाशक्तियां टैरिफ से सप्लाई चेन पर कब्जा जमाने को बेताब हैं, यह एफटीए निर्भरता के युग में पारदर्शी वार्ता का प्रतीक है। तेज बदलते वैश्विक समीकरणों में यह एक स्मार्ट कदम है।
टैरिफ में छूट से आगे बढ़कर यह समझौता मूल्यों पर अडिग रहते एकता का संदेश देता है। भारत अपनी राजनीतिक दृष्टि अटल रखते शीर्ष उत्पादक और सेवा केंद्र बनने की इच्छाशक्ति जाहिर कर रहा है।
यूरोप चाहता है कि सौदा ठोस परिणाम दे। बाजार पहुंच, ऊर्जा परिवर्तन, औद्योगिक सहयोग, तकनीकी साझेदारी और चेन मजबूती में स्पष्ट माइलस्टोन हों। कंपनियों के स्तर पर जियो-आर्थिक क्षेत्रों में साझा प्रयास अनिवार्य हैं।
97 प्रतिशत ईयू वस्तुओं पर टैरिफ राहत और 99 प्रतिशत भारतीय निर्यात को मूल्य आधारित लाभ मिला है। कारों पर 40 प्रतिशत ड्यूटी कायम, जबकि भारत औद्योगिक जरूरतों पर चरणबद्ध छूट देगा।
आर्थिक विविधीकरण के दबाव में ईयू के लिए एफटीए रणनीतिक मोड़ है। टीटीसी सेमीकंडक्टर और डिजिटल इंटरऑपरेबिलिटी को बढ़ावा दे रही है। एफटीए भरोसेमंद आपूर्ति और आरएंडडी को गति देगा।
अमेरिकी तकनीकी निर्भरता घटाने की ईयू की कोशिश में भारत एआई, डेटा सुरक्षा पर साझीदार बनेगा। यह अमेरिका-चीन प्रभाव के विकल्प रचेगा, जिससे दोनों पक्ष मजबूत होंगे।