राजनयिक हलचल से भरी नई दिल्ली में दूसरी भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए अरब दुनिया के प्रमुख नेता इकट्ठा हो रहे हैं। 10 साल के लंबे अंतराल के बाद हो रही इस बैठक को भारत और यूएई मिलकर आयोजित कर रहे हैं।
गुरुवार को लीग ऑफ अरब के महासचिव अहमद अबुल घीत ने कदम रखा, जिनका विदेश मंत्रालय ने जोरदार स्वागत किया। एक्स पर पोस्ट में कहा गया कि ये बैठकें भारत-अरब के बीच मजबूत साझेदारी की प्रतिबद्धता दर्शाएंगी।
कोमोरोस, फिलिस्तीन और सूडान के विदेश मंत्री भी उसी दिन पहुंचे, जिन्हें द्विपक्षीय प्रगति का प्रतीक बताया गया।
शुक्रवार को कतर के सुल्तान बिन साद अल मुरैखी, लीबिया के एल्ताहर एस एम एलबौर, सोमालिया के अब्दिसलाम अली और अहमद मोअलिम फिकी का आगमन हुआ। हर स्वागत में संबंधों को गहरा करने का उल्लेख रहा।
शुक्रवार को वरिष्ठ अधिकारियों की चौथी बैठक के बाद शनिवार को मुख्य आयोजन होगा। 2016 की पहली बैठक के बाद पहली बार हो रही यह चर्चा पांच प्रमुख क्षेत्रों—अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, शिक्षा, मीडिया, संस्कृति—पर केंद्रित रहेगी।
मार्च 2002 के एमओयू से बने इस संस्थागत ढांचे से सहयोग बढ़ेगा। ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे मुद्दों पर अपेक्षित निर्णय वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका को मजबूत करेंगे।
दक्षिण-दक्षिण सहयोग के इस प्रयास से लाखों लोगों को लाभ मिलेगा।