काबुल से बुरी खबरें आ रही हैं। संयुक्त राष्ट्र के ओसीएचए ने आगाह किया है कि 2026 में अफगानिस्तान के 1.44 करोड़ निवासियों को स्वास्थ्य सुविधाओं की सख्त जरूरत पड़ेगी। गुरुवार को स्थानीय प्रेस ने बताया कि वर्तमान प्रयासों से केवल 72 लाख को राहत मिलेगी।
बच्चों की संख्या 54 प्रतिशत, महिलाओं की 24 प्रतिशत और विकलांगों की 10 प्रतिशत है। इसके लिए 19 करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक चाहिए। देश 2026 में भी दुनिया का सबसे बड़ा सहायता संकट बनेगा, 2.2 करोड़ लोग मदद मांगेंगे।
एनजीओ और वैश्विक एजेंसियां टीके, प्रसव देखभाल और आपात सेवा बढ़ा रही हैं। यूनिसेफ ने मंगलवार को कहा कि 37 लाख बच्चे हर साल तीव्र कुपोषण से जूझते हैं। आर्थिक गिरावट, जलवायु संकट और धन अभाव ने समस्या गहरी की है।
ताजुद्दीन ओयेवाले ने अपडेटेड प्रोटोकॉल पेश कर तत्परता बरतने को कहा। डब्ल्यूएफपी के अनुसार, 90 प्रतिशत से ज्यादा परिवार भोजन के लिए तरस रहे हैं, बच्चों को स्थायी क्षति हो रही है।
गंभीर कुपोषण और शिशु देखभाल पर जोर देने वाली ये गाइडलाइंस जीवन बचाएंगी। गरीबी, खाद्य संकट, ग्रामीण अलगाव और महिला स्वास्थ्यकर्मियों पर रोक मुख्य वजहें हैं। मजबूत वैश्विक समर्थन ही रास्ता है।