फरवरी चुनावों की दहलीज पर बांग्लादेश तनावग्रस्त है। प्रशासनिक कमजोरियां व नीतियां राजनीतिक उन्माद, आर्थिक संकट, धार्मिक विभेद व नागरिक स्वतंत्रता हनन का कारण बन रही हैं, सभी वर्गों की एकसमान राय है।
ढाका ट्रिब्यून ने मीडिया पर हमलों को चेतावनी मानते हुए संपादकीय में कहा कि स्वतंत्र प्रेस ही सूचना का आधार है, जिसके बिना लोकतंत्र अधूरा।
मीडिया धीमी अर्थव्यवस्था, असहिष्णुता, राजनीतिक आग उगलते बयान, महिलाओं के अधिकार हनन व कानूनी समानता पर खतरे की कहानी सुना रहा है।
विकास ठहराव, महंगाई व नीतिगत निष्क्रियता से बाजार व घरेलू मोर्चे पर हाहाकार मचा है। चुनाव नजदीक आते ही दहशत गहरा रही।
सलाहकार यूनुस की धोखाधड़ी चेतावनी ने हलचल मचाई, फर्जी दस्तावेजों से वैश्विक छवि धूमिल हो रही है।
महिला मुद्दों पर जमीनी सच्चाई वादों से कोसों दूर, सुरक्षा, वेतन, देखभाल, न्याय व भागीदारी की कमी परक्राम्य है।
डेली स्टार के 20 महिलाओं के सर्वे से सामने आया कि हिंसा, नौकरी संकट, आर्थिक भय, स्वास्थ्य लापरवाही व सुधार सिफारिशों की उपेक्षा दैनिक संघर्ष बढ़ा रही।
प्रचार में धर्म व पहचान के हथियार धारदार, अल्पसंख्यक लिंचिंग जैसे दीपू दास कांड ने विश्व को स्तब्ध किया।