भारत-यूरोपीय संघ का विशालकाय व्यापार समझौता वैश्विक पटल पर छा गया, अमेरिका को आत्मचिंतन के लिए मजबूर कर दिया। 25% विश्व जीडीपी, 33% व्यापार का दायरा, 25 अरब डॉलर का द्विपक्षीय कारोबार—अमेरिका के 45 अरब से कम, लेकिन खतरे का एहसास कराने को काफी।
सेनेटरों, अधिकारियों, विश्लेषकों ने चिंता जताई—यह एफटीए वाशिंगटन को किनारे कर सकता है। केली ने सोशल मीडिया पर ट्रंप को जिम्मेदार ठहराया, सहयोगी अन्य गठजोड़ बना रहे।
नई दिल्ली की बड़ी घोषणा: इतिहास का महासौदा। वॉन डेर लेयेन ने 2 अरब उपभोक्ताओं वाले क्षेत्र का खाका खींचा। भू-राजनीतिक उथल-पुथल में मजबूत कड़ी।
बेसेंट ने ईयू को टैरिफ पर कोसा। आईटीआईएफ ने अमेरिका को आईना दिखाया—डिजिटल कानून पक्षपाती, भारत आईपी में कमजोर, लेकिन अवरोध हटने से लाभ। चीनविरोधी मोर्चे पर सराहनीय।
लिन्स्कॉट ने संयम बरतने को कहा—चरणबद्ध लाभ, विवादास्पद क्षेत्र स्थगित, अनुमोदन चुनौतीपूर्ण। अमेरिका के व्यापार को ठेस नहीं, बल्कि संभावनाएं।
लंबी प्रक्रिया के बाद साकार—अमेरिका के लिए रणनीतिक पुनर्मूल्यांकन का समय।