संयुक्त राष्ट्र बाल कोष यूनिसेफ ने अफगानिस्तान में व्याप्त बाल कुपोषण की भयावह स्थिति पर चिंता व्यक्त की है। प्रतिवर्ष 37 लाख बच्चे गंभीर कुपोषण से पीड़ित हो रहे हैं, जो वैश्विक स्तर पर सबसे चिंताजनक है।
कुपोषण निवारण के संशोधित दिशानिर्देशों के लोकार्पण पर ताजुद्दीन ओयेवाले ने कहा कि तत्काल प्रभावी कदमों से ही बच्चों को बचाया जा सकता है। स्थानीय मीडिया ने यह जानकारी साझा की।
आर्थिक संकट, लंबे सूखे और फंडिंग की कमी से 2021 के बाद समस्या बढ़ी। डब्ल्यूएफपी के आंकड़ों में 90 प्रतिशत परिवार भोजन असुरक्षा से जूझ रहे हैं, बच्चों के शारीरिक-मानसिक विकास को नुकसान पहुंच रहा।
दिशानिर्देशों में अत्यंत गंभीर कुपोषण के लिए उन्नत चिकित्सा और शिशु देखभाल के नए तरीके जोड़े गए हैं, जो जीवन बचाने में मील का पत्थर साबित होंगे।
कारणों में गरीबी, खाद्य संकट, चिकित्सा पहुंच की कमी और मातृ पोषण घाटा शामिल हैं। गांवों में हालात बदतर हैं, महिला डॉक्टरों पर रोक ने पहुंच बाधित की।
शिक्षा के मोर्चे पर भी हाहाकार: 90 प्रतिशत 10 वर्षीय बच्चे अशिक्षित। तालिबान के सत्ता प्राप्ति के बाद 22 लाख लड़कियां स्कूलों से बाहर।
यूनिसेफ ने शिक्षा और साक्षरता में लगातार निवेश पर जोर दिया। वरना कुपोषण-अशिक्षा का यह चक्र देश को पीछे धकेल देगा।