ट्रंप सरकार का टैरिफ आधारित व्यापार दांव उल्टा पड़ गया है। भारत इस साल अमेरिका से कहीं आगे निकलकर ढेर सारे समझौते कर चुका है, जिससे वॉशिंगटन में बेचैनी फैल गई। वेदा पार्टनर्स की हेनरीटा ट्रेज ने सीएनबीसी से कहा कि भारत ने ट्रंप से 100 प्रतिशत ज्यादा डील साइन की हैं।
अमेरिकी सांसद निराश हैं क्योंकि आक्रामक बयानबाजी सौदों में नहीं बदल पा रही। 90 दिनों में 90 डील का दावा खोखला साबित हुआ—10 महीने बीत गए, सिर्फ कंबोडिया-मलेशिया के दो सौदे। साउथ कोरिया वार्ता अटकी हुई है, जबकि पहले लगभग पूरा व्यापार टैरिफ-मुक्त था।
ईयू, जापान जैसे सहयोगियों पर टैरिफ दबाव बेकार गया। ट्रेज के अनुसार, आधे अमेरिकी टैरिफ समाप्ति चाहते हैं, जो सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच सकता है। इससे कोई बड़ा व्यापार समझौता नहीं हो पा रहा, जिसकी चिंता सांसदों को सता रही है।
व्हाइट हाउस पर राजनीतिक बोझ बढ़ रहा है। अर्थव्यवस्था को मजबूत दिखाने की कोशिश में ट्रंप को झटका लग रहा है। व्यापार नीति राष्ट्रपति की लोकप्रियता और पूरे देश में रिपब्लिकनों को नुकसान पहुंचा रही। आर्थिक जुड़ाव की ‘अमेरिका सेल फर्स्ट’ नीति रुकी वृद्धि के आगे लाचार नजर आ रही।