बलूचिस्तान प्रांत में सरकारी कर्मचारियों का गुस्सा फूट पड़ा है। डिस्पैरिटी रिडक्शन अलाउंस (डीआरए) समेत विभिन्न मांगों के लिए बलूचिस्तान एम्प्लॉयी ग्रैंड अलायंस (बेगा) ने क्वेटा व खुजदार में आक्रामक प्रदर्शन किए। कर्मचारियों ने सरकार को ultimatum दिया है कि मांगें पूरी हों, नहीं तो संघर्ष तेज होगा।
क्वेटा में बचा खान चौक से पुलिस स्टेशन तक मार्च निकाला गया। वहां धरने के दौरान नारे लगे और प्रदर्शन उग्र हो गया। पुलिस के अनुसार, 11 कर्मियों ने आत्मसमर्पण कर दिया। खुजदार में असलम नोटानी, मंजूर नौशाद, असलम जेहरी, राशिद गुलामानी जैसे नेताओं ने भव्य सभा का आयोजन किया।
कर्मचारियों ने मांग पूरी न होने पर चिंता जताई, जो प्रांतीय प्रशासन के लिए चुनौती बन गई। पहले 22 जनवरी को यूपीएसी ने फार्मासिस्टों के लिए घटिया भर्ती योजना को खारिज किया। क्वेटा प्रेस क्लब में कासिम अजीज मेंगल ने कहा कि यह ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ है।
उन्होंने ज्यादा पद, मेरिट-आधारित चयन और पारदर्शिता की अपील की। वॉक-इन इंटरव्यू को भ्रष्टाचार का माध्यम बताते हुए स्वास्थ्य विभाग की खामियों पर प्रहार किया। निजी अस्पतालों में फार्मेसी की कमी और संविदा भर्ती को गलत ठहराया।
20 जनवरी को रेड जोन धरना पुलिस ने कुचला, गिरफ्तारियां हुईं, इंटरनेट सेवाएं ठप। कंटेनर लगाकर रास्ते बंद किए गए, फिर भी प्रेस क्लब पर कर्मचारी पहुंचे। पुलिस कार्रवाई से कई हिरासत में, दफ्तरों का काम ठप।
बलूचिस्तान का यह आंदोलन आर्थिक विषमताओं को उजागर कर रहा है। प्रांत के पिछड़ेपन के बीच कर्मचारियों की पीड़ा गहरी है। सरकार को तत्काल कदम उठाने होंगे, वरना हालात बिगड़ सकते हैं।