बांग्लादेश में 12 फरवरी के लोकसभा चुनावों के मद्देनजर प्रचार अभियान तेज हो गया है। बीएनपी ने सबसे पहले जमात-ए-इस्लामी को घेरते हुए मतदाताओं से अपील की कि 1971 की जंग में पाकिस्तानी सेना के हमदर्दों को सत्ता की कुंजी न सौंपें, वरना राष्ट्र विनाश की राह पर चला जाएगा।
ठाकुरगांव जिले के सदर क्षेत्र में बीएनपी महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने बीडी हाई स्कूल के मैदान पर रैली में ठाकुरगांव-1 सीट से अपनी दावेदारी पेश करते हुए कही। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेताया, ‘जिन्होंने पाक फौज का आखिरी दम तक साथ दिया, वे ही वोट लेकर शासन चाहते हैं। देश को ऐसी तबाही से बचाएं।’
1971 के आंदोलन की याद ताजा करते हुए फखरुल बोले कि पाक दमन के विरुद्ध संघर्ष ने बांग्लादेश को जन्म दिया। हमारी असली पहचान वही है। हिंदू भाइयों को ललकारा कि उत्पीड़न की आशंका न पालें, सब सुरक्षित रहेंगे।
दूसरी ओर, जमात और एनसीपी ने विपक्षी दलों पर आचार संहिता तोड़ने के गंभीर आरोप लगाए। ढाका निर्वाचन आयोग में शिकायत के बाद जमात के जुबैर ने खुलासा किया कि महिला कार्यकर्ताओं पर अत्याचार हो रहे—घूंघट खोलने को मजबूर, मोबाइल छीनना। यदि नहीं रोका गया तो हालात बिगड़ेंगे।
एनसीपी नेताओं ने ढाका-18 में हमला और बीएनपी के ढाका-8 में सरकारी संसाधनों के गबन का मुद्दा उठाया। आयमान राहा बोलीं कि बिना सजा के उल्लंघन से भय का माहौल बन रहा, चुनावी समता खतरे में है।
हसीना सरकार उखाड़ फेंकने वाले साथी अब कुर्सी की जंग में आमने-सामने। बीएनपी का ऐतिहासिक हथियार तीखा है, जो वोटर भावनाओं को भुनाकर सियासी समीकरण बदल सकता है और आने वाले दिनों में अस्थिरता पैदा कर सकता है।