बीजिंग के वैज्ञानिकों ने खुलासा किया कि इबोला वायरस का एक खास म्यूटेशन कांगो के लंबे प्रकोप को और घातक बना दिया। सेल जर्नल में छपी यह रिपोर्ट निगरानी और इलाज की नई दिशा दिखाती है।
दूसरे सबसे बड़े इबोला संकट में 3,000 संक्रमण और 2,000 मौतें हुईं। शोध टीम ने 480 पूर्ण जीनोम स्कैन कर जीपी-वी75ए म्यूटेशन ढूंढा, जो ग्लाइकोप्रोटीन में था।
यह वैरिएंट जल्दी हावी हो गया और मामलों की तेज वृद्धि से मेल खाया। प्रयोगों ने पुष्टि की कि यह विभिन्न कोशिकाओं व चूहों में संक्रमण क्षमता बढ़ाता है।
एक और खतरा: मौजूदा एंटीवायरल दवाओं व एंटीबॉडी पर इसका नकारात्मक प्रभाव, जिससे प्रतिरोधकता बढ़ सकती है।
शोधकर्ता जोर देते हैं कि प्रकोप के दौरान लगातार जीनोम ट्रैकिंग से विकासवादी जोखिम रोके जा सकते हैं। यह वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा को सशक्त करेगी।