संयुक्त राष्ट्र की राजनीतिक प्रमुख रोजमेरी डिकार्लो ने अफगानिस्तान का दौरा रविवार को समाप्त कर लिया। काबुल में तालिबानी नेताओं, कूटनीतिज्ञों, महिला कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों और यूएन की स्थानीय महिला स्टाफ से बातचीत ने महिलाओं की बदतर स्थिति पर रोशनी डाली।
अधिकारियों के समक्ष डिकार्लो ने महिला यूएन कर्मियों पर प्रतिबंधों और लड़कियों-महिलाओं की पढ़ाई, नौकरी व सामाजिक जीवन पर अंकुशों की कड़ी निंदा की। तुरंत राहत प्रदान करने की मांग की गई।
दोहा वार्ताओं में सक्रियता और वैश्विक जिम्मेदारियों निभाने से अफगानिस्तान की बहाली संभव बताते हुए उन्होंने प्रेरित किया। संवाद जारी रखने का वादा हुआ।
मानवीय मद्द की निर्बाध सीमा आवागमन सुनिश्चित करने हेतु सहायता मांगी गई, संकट गहराने से रोकने के लिए।
महिलाओं व सिविल सोसाइटी के साथ मानवाधिकार बहस में यूएन अफगान महिलाओं के योगदान की प्रशंसा हुई, समर्थन का आश्वासन दिया।
2021 के बाद महिलाएं संकुचित क्षेत्रों में सिमटीं: नौकरियां छीनीं, सहायता संस्थाओं से विलोपन (चिकित्सा को छोड़), महरम यात्रा बंधन, बुर्का अनिवार्य, सार्वजनिक स्थल प्रतिबंधित, पत्रकारिता मंद। यह दौरा अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाता है।