भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच महत्वाकांक्षी द्विपक्षीय व्यापार समझौता अंतिम रूप लेने की दहलीज पर है। ज्यादातर मुद्दों पर आम सहमति हो चुकी है, किंतु शुल्क संरचना और अमल की समयबद्धता जैसे विवादास्पद बिंदु अब भी विचाराधीन हैं। पक्षकार एक विश्वसनीय और स्थायी व्यापार ढांचे के पक्षधर हैं।
हालिया हफ्तों में बातचीत ने उल्लेखनीय प्रगति की है, जिसमें बचे विवाद न्यूनतम रह गए हैं। जानकारों के अनुसार, विशेषज्ञ स्तरीय बहसें चल रही हैं। प्रमुख व्यापार अधिकारियों की सहमति के बाद यह मोदी-ट्रंप के पास पहुंचेगा।
प्रधानमंत्री मोदी तथा राष्ट्रपति ट्रंप की बारम्बार टेलीफोनिक चर्चाओं ने समझौते को आकार दिया। दावोस भाषण में ट्रंप ने मजबूत सौदे का आश्वासन दिया।
संभावित उपलब्धि में 50% अमेरिकी टैरिफ हटाना शामिल है, जो वस्त्र क्षेत्र को पीड़ित कर रहा। कुल मिलाकर व्यापार बढ़ा, हालांकि वस्त्रों में चुनिंदा वृद्धि और दवा निर्यात में सुधार हुआ।
अमेरिकी अदालती अनिश्चयताएं बाधा बन सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट का फैसला वर्तमान को अछूता रखेगा, लेकिन वैकल्पिक उपायों की कठोरियां नीतिगत बदलाव ला सकती हैं।
कांग्रेस में द्विपक्षीय आर्थिक जुड़ाव को बढ़ावा देने का व्यापक समर्थन है। इमीग्रेशन विवाद, विशेषकर वीजा शुल्कों से कंपनियां चिंतित हैं।
यह pact व्यापारिक बाधाओं को दूर कर नई ऊंचाइयों का मार्ग प्रशस्त करेगा।