तेहरान के राजदूत ने भारत के यूएनएचआरसी में दिए समर्थन पर शनिवार को धन्यवाद दिया। पश्चिमी प्रस्ताव, जो ईरान के प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई की आलोचना करता था, भारत ने ठुकरा दिया। मोहम्मद फथाली ने इसे न्यायपूर्ण कदम बताया।
प्रस्ताव पक्ष में 25 वोट पड़े, लेकिन भारत समेत 7 ने विरोध जताया। 14 ने परहेज किया। फथाली का एक्स पोस्ट भावुक था: ‘भारत का दृढ़ समर्थन संप्रभुता की रक्षा करता है। पश्चिम का यह प्रस्ताव पूर्वाग्रही है।’
भारत ने साफ संदेश दिया—किसी देश के घरेलू मामलों में दखल नहीं। यह हमारी परंपरागत नीति है। जापान, दक्षिण कोरिया, यूरोपीय देशों के दबाव के बावजूद अडिग रहा।
अमेरिका के व्यापारिक दबावों के समय यह कदम महत्वपूर्ण। चीन-पाकिस्तान के साथ संयोगिक एकजुटता रणनीतिक है। ईरान से तेल और अफगानिस्तान पहुंच मजबूत होंगी।
वैश्विक दक्षिण की आवाज बुलंद हुई। भारत ने सिद्ध किया कि वह किसी के आगे नहीं झुकेगा। यह कूटनीतिक जीत है, जो रिश्तों को नई ऊंचाई देगी।
पश्चिम को चेतावनी: भारत बहुपक्षीयता का पैरोकार है। भविष्य में ऐसे फैसले बढ़ेंगे।