अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शुरू शांति बोर्ड ने वैश्विक मंच पर हलचल मचा दी। 60 देशों के बीच 25 ने शामिल होने का फैसला किया, बाकी ने साफ मना कर दिया। गाजा, यूक्रेन, वेनेजुएला जैसे संकटों के समाधान के लिए यह प्लेटफॉर्म महत्वाकांक्षी है।
सूची में इजरायल, बहरीन, मोरक्को, अर्जेंटीना, आर्मेनिया, अजरबैजान, बुल्गारिया, हंगरी, इंडोनेशिया, जॉर्डन, कजाकिस्तान, कोसोवो, पाकिस्तान, पराग्वे, कतर, सऊदी अरब, तुर्की, यूएई, उज्बेकिस्तान, बेलारूस, मिस्र, वियतनाम, मंगोलिया प्रमुख। आठ मुस्लिम राष्ट्रों का समर्थन सकारात्मक संकेत।
पीएम मोदी को गाजा समझौते से जुड़े निमंत्रण पर भारत चुप्पी साधे हुए, विचार चल रहा। फ्रांस, यूके, चीन, जर्मनी जैसे दबंग अनदेखा कर गए। पुतिन का जवाब- जमे हुए फंड से 1 बिलियन डॉलर देकर गाजा-फिलिस्तीन सहायता।
दावोस में जेलेंस्की-ट्रंप वार्ता तय। तीन साल का कार्यकाल, स्थायी सदस्यता पर 1 बिलियन का बोझ। रूस, जर्मनी आदि अटके हुए। यह पहल अंतरराष्ट्रीय संबंधों में नया अध्याय लिख सकती है या विभाजन को गहरा सकती है।