बलूचिस्तान प्रांत में जबरन गुमशुदगी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। हालिया दिनों में सात लोगों के गायब होने की घटनाएं दर्ज की गईं, जो स्थानीय निवासियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं।
15 जनवरी को तुर्बत के अस्पताल के बाहर बल-निगोर के मेहरान बलूच को सुरक्षा बलों ने पकड़ लिया। परिजन कहते हैं कि उसके ठिकाने या कारण की कोई खबर नहीं।
खारान में हमले के बाद छापेमारियों से ओवैस अहमद कंबरानी वाहन सहित हिरासत में। बलूच आबाद में तीन युवक- मुनीब सियापद, मखफर आबिद सियापद, अहमद सियापद भी गायब।
क्वेटा के किली कंबरानी से अब्दुल कहार व मुसव्विर कंबरानी घरों से अगवा। परिवार बेचैन। पांच पुराने लापता घर लौटे, लेकिन समस्या जस की तस।
एचआरसीबी ने सरकार के ‘मुद्दा हल’ बयान को झूठा बताया। 2025 के आंकड़े भयावह: 1,455 मामले, 1,052 लापता, 83 हिरासत में मृत।
बिना कानूनी प्रक्रिया के उठाना असंवैधानिक। संगठन बोला, ‘यह अपराध है, प्रोपेगैंडा नहीं।’ न्याय की मांग तेज।