भारत और अमेरिका के बीच अवैध ड्रग्स तथा प्रीकर्सर रसायनों के दुरुपयोग से निपटने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ा है। वॉशिंगटन में ड्रग पॉलिसी एग्जीक्यूटिव वर्किंग ग्रुप की प्रारंभिक बैठक 20-22 जनवरी 2026 को संपन्न हुई, जहां सिंथेटिक ओपिओइड्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के खतरे पर संयुक्त कार्रवाई का संकल्प लिया गया।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, बैठक में वैध कारोबार को सुगम बनाते हुए कठोर प्रवर्तन पर जोर दिया गया। राजदूत विनय मोहन क्वात्रा के उद्घाटन भाषण में आपसी सहयोग की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला गया।
भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया पर साझा किया कि क्वात्रा ने सारा कार्टर के साथ काउंटर-नारकोटिक्स ढांचे पर चर्चा की, जिसमें तस्करी रोकने के लिए प्रभावी द्विपक्षीय तालमेल पर बल दिया गया।
पिछले वर्ष एनसीबी की बड़ी सफलता का जिक्र हुआ, जब नई दिल्ली में एक साधारण जांच ने वैश्विक ड्रग सिंडिकेट का पर्दाफाश किया। यह गिरोह क्रिप्टोकरेंसी, अनाम शिपिंग और एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म्स से भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया व यूरोप में सक्रिय था।
अमित शाह ने आधुनिक तस्करी तकनीकों पर नजर रखने वाली एजेंसियों की सराहना की। अमेरिकी दूतावास ने भी ड्रग्स के खिलाफ सहयोग से जान बचाने में भारत की भूमिका को रेखांकित किया।
यह पहल वैश्विक स्तर पर ड्रग्स की लहर को रोकने के लिए मजबूत नींव रखती है, जिसमें सतत निगरानी, तकनीकी सहायता और अभियान शामिल हैं।