पाकिस्तान सरकार के ट्रंप के ‘पीस बोर्ड’ में कूदने के ऐलान से सियासी हंगामा मच गया है। सीनेट विपक्ष ने इसे फिलिस्तीन के खिलाफ सौदेबाजी करार देते हुए सरकार पर हमला बोला है। अल्लामा राजा नासिर अब्बास ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी।
अब्बास ने कहा कि गाजा युद्ध के बाद बनी यह व्यवस्था पुनर्निर्माण के बहाने फिलिस्तीनी शासन को विदेशी हाथों में सौंप रही है। यह नव-उपनिवेशवाद का प्रतीक है, जो आत्मनिर्णय को कुचल देगा। उन्होंने बोर्ड के विस्तार को यूएन को कमजोर करने की चाल बताया।
तहरीक-ए-तहाफुज-ए-आइन के मुस्तफा नवाज खोखर ने आरोप लगाया कि बिना संसद या जनता से राय लिए यह फैसला तानाशाही है। एक्स पोस्ट में उन्होंने बोर्ड को गाजा पर कब्जे की कोशिश कहा, जहां ट्रंप को असीमित शक्तियां हैं।
चार्टर के मुताबिक, ट्रंप सदस्य चुनेंगे, बर्खास्त करेंगे, मीटिंग तय करेंगे। एक बिलियन डॉलर से स्थायी सीट का विकल्प अमीरों का बाजार बना देता है।
मलीहा लोधी ने चेताया कि ट्रंप अपने निजी एजेंडे को वैश्विक समर्थन दिला रहे हैं, बोर्ड का क्षेत्र गाजा तक सीमित नहीं। सरकार का शामिल होना जोखिम भरा है।
विदेश मंत्रालय ने कहा था कि यूएन रेजोल्यूशन 2803 के तहत यह कदम शांति, सहायता और पुनर्निर्माण को बढ़ावा देगा।
विपक्ष का कहना है कि यह कदम पाकिस्तान की साख को ठेस पहुंचाएगा। राजनीतिक दलों में एकजुटता बन रही है, जो सरकार के लिए चुनौती है। भविष्य की कूटनीति पर असर पड़ सकता है।