स्विट्जरलैंड के दावोस में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोप पर निशाना साधा। विश्व आर्थिक मंच के मंच से उन्होंने महाद्वीप की नीतियों की आलोचना की और अमेरिका की सफलता का बखान किया। ट्रंप ने कहा कि यूरोप अब सही轨迹 पर नहीं है।
संबोधन की शुरुआत हल्के लहजे से की, ‘दोस्तों और कुछ शत्रुओं के बीच लौटना सुखद है।’ फिर सीधे मुद्दे पर आ गए। बिना ब्रेक के बड़े पैमाने पर माइग्रेशन, फिजूल सरकारी खर्च और सस्ते आयात को यूरोप की मुसीबतों का कारण बताया। ‘कई जगहें ऐसी हो गई हैं जो पहचान में नहीं आतीं,’ उन्होंने उदाहरण देकर कहा।
लोग यात्रा से लौटते हैं और शिकायत करते हैं कि इलाके बदल चुके हैं। हरित ऊर्जा पर ट्रंप का तंज कसा कि यह विकास को रोक रही है। उधर अमेरिका में ट्रंप की टैरिफ नीति ने चमत्कार कर दिखाया। घाटा घटा, अर्थव्यवस्था मजबूत हुई। जापान और दक्षिण कोरिया जैसे सौदों ने न सिर्फ अमेरिकी बाजार, बल्कि वैश्विक शेयर बाजारों को उछाल दिया।
ट्रंप का संदेश साफ है- यूरोप को अमेरिका की नकल करनी चाहिए। सीमाएं सुरक्षित रखें, खजाना संभालें और व्यापार में सख्ती बरतें। दावोस जैसे वैश्विक मंच पर यह बयान यूरोपीय संघ के लिए आईना है। बढ़ते असंतोष के बीच क्या नेता सुधरेंगे, यह आने वाला समय बताएगा। ट्रंप की बातें बहस छेड़ सकती हैं।