टोक्यो। शिंजो आबे हत्याकांड में नया मोड़ आया जब नारा डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने आरोपी तेत्सुया यामागामी को आजीवन कारावास की कठोर सजा भुगताने का फैसला सुनाया। 2022 की इस सनसनीखेज घटना में यामागामी ने स्वयं बनाई बंदूक से नारा में भाषणरत आबे को निशाना बनाया, जो जापान के इतिहास का काला पन्ना बन गया।
कोर्ट ने हत्या और अवैध हथियार प्रयोग के आरोपों को सिद्ध मानते हुए सजा को बरकरार रखा। यामागामी ने अपना अपराध कबूल किया, लेकिन उसके वकील बचाव में पारिवारिक विपत्तियों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि यूनिफिकेशन चर्च को मां के 100 मिलियन येन दान ने परिवार को बर्बाद कर दिया, और आबे को इसके जिम्मेदार ठहराया।
इस मामले ने चर्च की चालाकी भरी फंडरेजिंग पर सवाल उठाए। जांच के बाद अदालत ने संगठन को खत्म करने और सुविधाएं छीनने का हुक्म दिया। सरकार ने 2022 में नया कानून बनाकर ऐसी ठगियों पर लगाम कसी, खासकर उन बच्चों पर जो माता-पिता के कारण पीड़ित हुए।
शिंजो आबे का राजनीतिक सफर प्रेरणादायक था। पिता के नक्शेकदम पर चलकर वह हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स पहुंचे और रिकॉर्ड काल तक पीएम बने। उनकी ‘अबेनॉमिक्स’ नीति ने जापान को नई दिशा दी। यह फैसला आबे के सम्मान में न्याय की जीत है और भविष्य के लिए सबक।