अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गाजा शांति योजना को बल मिला है, क्योंकि इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का न्योता कबूल कर लिया। यह बोर्ड विश्व स्तर पर संघर्षों का समाधान करने के उद्देश्य से बनाया गया है, गाजा से शुरूआत करेगा।
एक्स पर नेतन्याहू कार्यालय की पोस्ट में कहा गया कि वे ट्रंप के निमंत्रण पर राजी हैं और वैश्विक नेताओं के दायरे में शामिल होंगे। ट्रंप हमेशा इसके प्रमुख रहेंगे। दूसरे चरण में हमास से पूर्ण समर्पण की अपेक्षा है- हथियार डालना, सुरंगें नष्ट करना और टेक्नोक्रेटिक फिलीस्तीनी शासन को स्वीकारना।
पहले चरण में सभी जीवित बंधक छूटे, मगर एक शव बाकी है, जिसके कारण इजरायल में विरोध हो रहा है। पूर्ण मुक्ति तक आगे न बढ़ने की मांग तेज।
सूची में अर्जेंटीना, अजरबैजान, बेलारूस, हंगरी, कजाकिस्तान, मोरक्को, यूएई, वियतनाम शामिल। भारत अभी मोदी को मिले न्योते पर विचारशील। रूस ने पुतिन को प्राप्त प्रस्ताव की पुष्टि की, विस्तार से जांच जारी। 60 देश निशाने पर।
कूटनीतिज्ञ चिंतित कि यह यूएन को चुनौती देगा। तीन साल का कार्यकाल, स्थायी के लिए 1 बिलियन डॉलर का कथित शुल्क। ट्रंप का यह दांव कूटनीति के नए दौर की शुरुआत कर सकता है।