मानवाधिकार संगठन बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) ने पूरी दुनिया को 25 जनवरी को ‘बलूच नरसंहार स्मरण दिवस’ पर पाकिस्तान के अत्याचारों से रूबरू कराने का फैसला किया है। बलूच भाईचारे से अपील है कि वे प्रदर्शन, सेमिनार, मीडिया इवेंट, वीडियो, चर्चाएं, ब्रॉडकास्ट, वेबिनार और कलात्मक प्रयासों में शरीक हों।
एक्स बयान में बीवाईसी ने स्पष्ट किया कि बलूच नरसंहार उनकी पहचान पर हमले से शुरू हुआ। यह केवल खुले कत्लेआम नहीं, बल्कि धीमी मौत है—उपेक्षा, महामारी, गरीबी, भय और यातनाओं से। ड्रोन, हत्याएं, गुमशुदगी, स्वास्थ्य वंचन और आर्थिक शोषण इसके हथियार हैं।
2024 की सरयाब शाहवानी मैदान सभा में इस दिन को नाम दिया गया। 2014 की तोटक मासूमियत—पाक खुफिया समर्थित मिलिशिया द्वारा 100+ युवकों की लाशें सामूहिक कब्र में—की याद में। बलूचिस्तान में और कब्रें मिलीं, परिवार बेचैन।
‘सभी लाशों की पहचान एक: बलूच,’ बयान कहता है। दलबांदिन की 2023 सभा ने संसाधन चोरी के विरुद्ध संकल्प लिया। पाक डेथ स्क्वायड आज भी सक्रिय। यह वैश्विक अभियान बलूच अस्तित्व की लड़ाई को मजबूत करेगा, दुनिया को सच बताएगा।