अमेरिका और यूरोप के बीच तनाव बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। ब्रुसेल्स में यूरोपीय संघ के शीर्ष नेता उर्सुला वॉन डर लेयेन और एंटोनियो कोस्टा ने ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीति की कड़ी निंदा की है। ग्रीनलैंड को लेकर यह धमकी ट्रांसअटलांटिक साझेदारी को नुकसान पहुंचाएगी।
ट्रंप का प्लान स्पष्ट है- एक फरवरी से आठ यूरोपीय देशों के आयात पर 10% शुल्क, जो जून में बिना समझौते 25% हो जाएगा। इससे व्यापार बाधित होगा और आर्थिक नुकसान होगा।
दुनिया के सबसे विशाल द्वीप ग्रीनलैंड पर डेनमार्क का आधिपत्य है, लेकिन रक्षा मामले कोपेनहेगन तय करता है। अमेरिकी सैन्य उपस्थिति के बावजूद ट्रंप की अधिग्रहण इच्छा पर सहमति नहीं।
डेनमार्क के विदेश मंत्री ने हैरानी जताई और ब्रुसेल्स से समन्वय की पुष्टि की। नॉर्डिक नेता जोर देकर कह रहे हैं कि सहयोगी देशों में दबावतंत्र की जगह संवाद हो।
दोनों यूरोपीय नेताओं ने संप्रभुता को वैश्विक कानून का मूल बताया। यूरोप संयुक्त रूप से खड़ा रहेगा और प्रतिबद्धताओं पर अडिग रहेगा। टैरिफ से संबंध कमजोर होंगे और विवाद बढ़ेंगे।
यह घटना व्यापारिक हितों को चुनौती दे रही है। उद्योग जगत सतर्क है। कूटनीतिक प्रयास तेज हो सकते हैं, लेकिन ट्रंप की जिद से स्थिति जटिल बनी हुई है। भविष्य की दिशा तय करने वाले हफ्ते आगे हैं।