नेपाल की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक पार्टी नेपाली कांग्रेस दो गुटों में बंट चुकी है और अब इसकी वैधता सुप्रीम कोर्ट तय करेगा। पूर्व पीएम शेर बहादुर देउबा गुट ने चुनाव आयोग के थापा गुट को मान्यता देने के फैसले के खिलाफ अदालत जाने का फैसला किया है। 5 मार्च के चुनाव नजदीक हैं, ऐसे में यह जंग और तीखी हो गई है।
आयोग ने शुक्रवार को गगन थापा के विशेष महासभा से चुने गए नेतृत्व को वैध बताया, जो देउबा की मंजूरी के बिना आयोजित हुई थी। देउबा गुट ने शनिवार को तय किया कि कार्यवाहक अध्यक्ष पूर्ण बहादुर खड़का रविवार को ही याचिका दायर करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग ने उनके प्रमाणों को अनदेखा किया और संविधान-विधान का पालन नहीं किया।
वहीं थापा गुट की शनिवार की बैठक में चुनावी एकजुटता पर बल दिया गया। प्रवक्ता देवराज चालिसे ने कहा कि नेताओं को एकजुट होकर चुनाव लड़ना होगा। देउबा को पार्टी में संरक्षक पद ऑफर करने का प्लान भी बना।
एफपीटीपी नामांकन 20 जनवरी को बंद हो जाएगा, जिसमें 165 सीटें दांव पर हैं। आनुपातिक की 110 सीटों की सूची तैयार है। अदालत अगर फैसले पर रोक न लगाए तो थापा गुट का दबदबा हो जाएगा।
यह झगड़ा पार्टी की ताकत को कमजोर कर सकता है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप ही एकमात्र रास्ता है। फैसला आने तक नेपाल की सियासत सांस थामे देख रही होगी।