बांग्लादेश में राजनीतिक संकट ने भारतीय मेडिकल छात्रों की जिंदगी कठिन बना दी है। 9,000 से अधिक छात्र, जो सस्ते एमबीबीएस के लिए यहां आए थे, अब डर के साये में जी रहे। भारत-विरोधी भावनाओं ने सुरक्षित माहौल को तहस-नहस कर दिया।
कम फीस ने सालों तक आकर्षित किया, लेकिन हसीना सरकार गिरने के बाद हालात बिगड़े। दिसंबर की लूटपाट घटना ने भय पैदा किया—विदेशी होने पर निशाना। छात्र चुपचाप चलते हैं, भीड़ से दूर, हमेशा चौकन्ने।
चुनावी माहौल में हिंसा चरम पर। अंतरिम सरकार आंकड़े दिखाती है, लेकिन मनोबल टूटा है। खासकर हिंदू छात्र चिंतित, धार्मिक हमलों से डरे। परीक्षाओं में भेदभाव साफ।
छात्र शिक्षा के सेतु हैं, राजस्व देते हैं। लेकिन अनिश्चय ने सपनों को झकझोर दिया। राजनीति ने शिक्षा को घेर लिया। परिवार परेशान, दूतावास सतर्क। बांग्लादेश का भविष्य इस पर निर्भर—शांति कब लौटेगी?