खाड़ी क्षेत्र में कुवैत भारत का प्रमुख साझेदार है, जहां ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार के साथ लाखों भारतीय बसते हैं। रोचक तथ्य यह कि 1961 तक कुवैत में भारतीय रुपया चलन में था। 17,818 वर्ग किमी में बसे 50 लाख से अधिक कुवैती भारत को महत्वपूर्ण मानते हैं।
राजनयिक संबंध 1961 से हैं, जो शांति और स्थिरता पर आधारित हैं। दोनों देश एक-दूसरे के रुख का सम्मान करते हैं।
उच्चस्तरीय यात्राओं और मंत्रालयीन बैठकों से रिश्ते प्रगाढ़ हैं। पीएम मोदी का 2024 दौरा मील का पत्थर साबित हुआ, जो 1981 के बाद पहली ऐसी यात्रा थी।
ऐतिहासिक व्यापार खजूर-घोड़ों से तेल तक पहुंचा। 1962 युद्ध में कुवैत का साथ मिला, 1990 में मतभेद हुए लेकिन अब सब ठीक है।
10 लाख भारतीय कुवैत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं—चिकित्सा, इंजीनियरिंग, आईटी में सक्रिय। आयात-निर्यात में तेल, रसायन आते हैं, चावल, मसाले, फार्मा जाते हैं।
आजादी के बाद के रिश्ते मजबूत पाये पर खड़े हैं, जो आने वाले समय में और फलेंगे-फूलेंगे।