डेनमार्क व ग्रीनलैंड में ट्रंप की ग्रीनलैंड हथियाने की योजना के खिलाफ जनाक्रोश चरम पर है। ‘हैंड्स ऑफ ग्रीनलैंड’ मुहिम के तहत शनिवार को विशाल धरने-प्रदर्शन होंगे, जो अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के कोपेनहेगन दौरे से ठीक मेल खाते हैं।
ग्रीनलैंड समर्थक संगठन ‘उआगुट’ ने ऑनलाइन ऐलान किया- ‘हम ग्रीनलैंड के लोकतंत्र व अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट हैं।’ डेनिश अखबार ‘द लोकल डीके’ ने सोशल मीडिया के दम पर लाखों की भागीदारी की भविष्यवाणी की।
ट्रंप के दूत जेफ लैंड्री ने पुष्टि की कि अधिग्रहण ‘जरूर होगा’। राष्ट्रपति ने टैरिफ हथियार उठाया- ‘हमारी योजना का विरोध? तो व्यापारिक प्रतिबंध लगेंगे।’ ग्रीनलैंड को राष्ट्रीय सुरक्षा का केंद्र बताया।
नाटो के फ्रांस, जर्मनी, यूके, नॉर्वे व स्वीडन जैसे मित्रों ने आर्कटिक में सैन्य बलाबल बढ़ाया। डेनमार्क की मेटे फ्रेडरिकसेन ने कहा- यह नाटो की सामूहिक जिम्मेदारी।
56-57 हजार निवासियों वाला यह क्षेत्र 1979 से स्वायत्त है, रक्षा डेनमार्क संभालता। आजादी की पुकार है, मगर अमेरिकी राज को पहचान-विनाशक माना जा रहा।
प्रदर्शनों से ट्रंप की महत्वाकांक्षाओं को झटका लग सकता है, जो वैश्विक समीकरण बदलने वाला साबित होंगे।