नेपाल की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी नेपाली कांग्रेस औपचारिक रूप से दो फाड़ हो गई और 17 जनवरी को चुनाव आयोग ने गगन थापा के नेतृत्व को वैध घोषित कर विवाद को नया मोड़ दे दिया। थापा पक्ष जश्न मना रहा है जबकि देउबा दल ने राष्ट्रव्यापी धरना-प्रदर्शन का ऐलान कर दिया।
आयोग की बैठक में कार्यवाहक मुख्य आयुक्त राम प्रसाद भंडारी ने थापा की विशेष महाधिवेशन से चुनी समिति को मान्यता दी। बहुमत के फैसले में एक आयुक्त का विरोध दब गया।
निर्णय के तीन मजबूत पाए थे। पार्टी संविधान के अनुसार 40 फीसदी प्रतिनिधि विशेष अधिवेशन बुला सकते हैं, जो केंद्रीय समिति की अनिच्छा के बावजूद हुआ। प्रतिनिधियों की सर्वोच्चता और बिना आपत्ति के अधिवेशन ने इसे पुख्ता किया।
थापा ने तत्काल बयान देकर कहा, ‘आयोग ने संविधान का पालन किया। यह विवादास्पद नहीं।’ उन्होंने कार्यकर्ताओं से एकजुट होने को कहा, देउबा का सम्मान किया और पार्टी पुनर्निर्माण का संकल्प लिया।
दूसरी ओर देउबा गुट असंतुष्ट है। उन्होंने पहले ही विरोध की चेतावनी दी थी और शनिवार को ललितपुर मुख्यालय में बैठक तय की। आयोग ने विकल्प दिया कि वे अलग पार्टी बना लें।
फैसले से कांग्रेस में गहरी दरार पड़ेगी, जो मार्च चुनावों को प्रभावित कर सकती है। कानूनी रुख अपनाने पर polls में बाधा संभव। नेपाल की राजनीति में यह घटना मील का पत्थर साबित हो सकती है, जहां नई पीढ़ी पुरानी सत्ता को चुनौती दे रही है।