बांग्लादेश की सियासत में भूचाल आ गया है। जमात-ए-इस्लामी के गठबंधन से इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश (आईएबी) ने अलगाव की घोषणा कर दी। कारण- सीटों के बंटवारे में भेदभाव। 12 फरवरी के लोकसभा चुनाव नजदीक आते ही यह फूट विपक्ष के लिए बड़ा झटका साबित हो सकती है।
ढाका में शुक्रवार को प्रेस वार्ता में आईएबी प्रवक्ता गाजी अताउर रहमान ने कहा कि गठबंधन की प्रक्रिया ने उनकी पार्टी का अपमान किया। 270 में से 268 नामांकन वैध होने पर सभी उम्मीदवार मैदान में डटे रहेंगे। गठबंधन की प्रेस कॉन्फ्रेंस का उन्होंने बहिष्कार किया था।
रहमान ने जमात पर मनमानी का इल्जाम लगाते हुए कहा कि अलायंस इस्लामी विचारधारा से दूर हो गया। नामांकन की अंतिम तिथि 29 दिसंबर को गठबंधन वार्ता टूटने से जमात ने 276 और आईएबी ने 268 सीटों पर दावेदारी ठोकी।
11 दलों का यह गठबंधन इस्लामी वोटों को एकजुट करने की कोशिश में तीन माह से जुटा था, लेकिन अंतिम समय में मतभेद भारी पड़े। चुनाव आयोग के आंकड़े इस उलझन को उजागर करते हैं। अब स्वतंत्र लड़ाई से वोट बैंक बंट सकता है।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, यह विभाजन सत्ता पक्ष को फायदा पहुंचा सकता है। चुनावी रणनीतियां बदल रही हैं, और मतदाता इस बदलाव को गौर से देख रहे हैं। नतीजे क्या होंगे, इसका इंतजार सबको है।